Ardhanareeswara Stotram (अर्धनारीश्वर स्तोत्र सम्पूर्ण 8 श्लोक)

Ardhanareeswara Stotram (अर्धनारीश्वर स्तोत्र) सम्पूर्ण 8 श्लोक

Introduction (परिचय)

Ardhanareeswara Stotram (अर्धनारीश्वर स्तोत्र सम्पूर्ण 8 श्लोक)

आज हम आपको भगवान शिव और माता पार्वती के ”अर्धनारीश्वर स्तोत्र सम्पूर्ण 8 श्लोक” के बारे में बताएंगे।

अर्धनारीश्वर भगवान शिव और माता पार्वती का अद्भुत संयुक्त स्वरूप है, जिसमें आधा शरीर भगवान शिव का और आधा शरीर माता पार्वती का होता है। इसका तात्पर्य यह है कि सृष्टि के संचालन में पुरुष (शिव) और स्त्री (पार्वती) दोनों का समान महत्व है। सनातन धर्म में अर्धनारीश्वर का यह स्वरूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में स्त्री और पुरुष ऊर्जा का संतुलन ही सुख, शांति और सफलता का मूल है।

यह रूप संतुलन, समरसता, प्रेम और एकता का प्रतीक माना जाता है।


अर्धनारीश्वर स्वरूप का महत्व

अर्धनारीश्वर का स्वरूप यह बताता है कि शिव बिना पार्वती के और पार्वती बिना शिव के अपूर्ण हैं। दोनों मिलकर ही शिव शक्ति कहलाते हैं. यह स्वरूप हमें जीवन में संतुलन, सहयोग और सम्मान का संदेश देता है। दोनों का मिलन ही सृष्टि का आधार है।

  • अर्धनारीश्वर स्तोत्र की रचना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।
  • इस स्तोत्र में 8 श्लोक हैं।

Ardhanareeswara Stotram (अर्धनारीश्वर स्तोत्र) का पाठ करने के लाभ

इस स्तोत्र में अर्धनारीश्वर के दिव्य रूप का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। इसका पाठ करने से मन शांत रहता है, आध्यात्मिक उन्नति होती है, और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है। इस स्तोत्र में हमें स्त्री-पुरुष ऊर्जा का संतुलन देखने को मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


संपूर्ण 8 श्लोक (हिंदी अर्थ सहित)

श्लोक 1

हिंदी अर्थ:

जिनके आधे शरीर का वर्ण चम्पा पुष्प के समान सुनहरा और गौर है (माँ पार्वती), और जिनके आधे शरीर का वर्ण कपूर के समान श्वेत और उज्ज्वल है (भगवान शिव), जिनके केश सुंदर रूप से बंधे हुए हैं (माँ पार्वती), और जिनकी जटाएँ धारण की हुई हैं (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 2

कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै चितारजःपुञ्जविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनके शरीर पर कस्तूरी और कुमकुम का लेप सुशोभित है (माँ पार्वती), और जिनके शरीर पर चिता की भस्म का लेप किया हुआ है (भगवान शिव), जो कामदेव को उत्पन्न करने वाली हैं (माँ पार्वती), और जिन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 3

रणत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै पादाब्जराजत्फणिनूपुराय ।
हेमाङ्गदायै भुजगाङ्गदाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनके हाथों में कंगन और पैरों में नूपुर मधुर ध्वनि कर रहे हैं (माँ पार्वती), और जिनके चरणकमलों में सर्प रूपी नूपुर सुशोभित है (भगवान शिव), जिनके भुजाओं में स्वर्ण के बाजूबंद हैं (माँ पार्वती), और जिनकी भुजाओं में सर्प ही बाजूबंद के रूप में विराजमान है (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 4

विशालनिलोत्पललोचनायै विकासिपङ्केरुहलोचनाय ।
समेक्षणायै विषमेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनकी आँखें विशाल नीले कमल के समान हैं (माँ पार्वती), और जिनकी आँखें खिले हुए कमल के समान हैं (भगवान शिव), जिनकी दृष्टि समान और करुणामयी है (माँ पार्वती), और जिनकी दृष्टि विषम है, अर्थात् तीन नेत्रों वाली है (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 5

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालाङ्कितकन्धराय ।
दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनके केश मन्दार पुष्पों की माला से सुसज्जित हैं (माँ पार्वती), और जिनके कंधे पर खोपड़ियों की माला सुशोभित है (भगवान शिव), जो दिव्य वस्त्र धारण करती हैं (माँ पार्वती), और जो दिगम्बर हैं, अर्थात् आकाश को ही वस्त्र मानते हैं (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 6

अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनके केश वर्षा के बादलों के समान श्याम और सुन्दर हैं (माँ पार्वती), और जिनकी जटाएँ बिजली के समान ताम्र (तांबे) रंग की प्रभा से युक्त हैं (भगवान शिव), जो स्वयं से परे किसी अन्य ईश्वर को नहीं मानतीं (माँ पार्वती), और जो सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 7

प्रपञ्चसृष्ट्युनमुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जो अपने लास्य नृत्य द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति के लिए प्रवृत्त होती हैं (माँ पार्वती), और जो अपने ताण्डव नृत्य द्वारा समस्त सृष्टि का संहार करते हैं (भगवान शिव), जो सम्पूर्ण जगत की जननी हैं (माँ पार्वती), और जो सम्पूर्ण जगत के एकमात्र पिता हैं (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


श्लोक 8

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

हिंदी अर्थ:

जिनके कानों में प्रज्वलित रत्नों से दमकते हुए कुण्डल सुशोभित हैं (माँ पार्वती), और जिनके आभूषण के रूप में भव्य और दीप्तिमान महान सर्प विराजमान हैं (भगवान शिव), जो शिव से पूर्ण रूप से संयुक्त और अभिन्न हैं (माँ पार्वती), और जो शक्ति से युक्त होकर सम्पूर्ण हैं (भगवान शिव), ऐसी शिवा (पार्वती) को नमस्कार है और ऐसे शिव को भी नमस्कार है।


कब और कैसे करें पाठ?

अर्धनारीश्वर स्तोत्र का पाठ रोजाना प्रातःकाल, सोमवार या शिवरात्रि के दिन करना चाहिए, इसके लिए शिवलिंग या अर्धनारीश्वर की प्रतिमा के सामने पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए और श्रद्धा और शुद्ध मन से इसे पढ़ना चाहिए।


Conclusion (निष्कर्ष)

अर्धनारीश्वर स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि प्रेम और समरसता का संदेश देने वाला दिव्य स्तोत्र है। इसके नियमित पाठ से जीवन में संतुलन आता है, और यह जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: अर्धनारीश्वर का अर्थ क्या है?

उत्तर: अर्धनारीश्वर का अर्थ आधा शिव और आधा पार्वती का संयुक्त रूप है।

प्रश्न 2: अर्धनारीश्वर स्तोत्र किसने लिखा?

उत्तर: अर्धनारीश्वर स्तोत्र आदि शंकराचार्य जी ने लिखा है।

प्रश्न 3: इसमें कितने श्लोक हैं?

उत्तर: इसमें कुल 8 श्लोक हैं।

प्रश्न 4: इसका पाठ कब करना चाहिए?

उत्तर: इसका पाठ प्रातःकाल, सोमवार या शिवरात्रि के दिन करना चाहिए।

प्रश्न 5: अर्धनारीश्वर स्तोत्र का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

उत्तर: इसका नियमित पाठ करने से वैवाहिक सुख तथा मानसिक शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।


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